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सरन घई

लेखक, शिक्षाविद्, समाजसेवी एवं संस्थापक-अध्यक्ष, विश्व हिंदी संस्थान, कनाडा

Saran Ghai

जीवन परिचय

🎂

जन्म

15 जून 1950, जयपुर, राजस्थान, भारत

🎓

शिक्षा

इतिहास, हिंदी और अंग्रेजी में एम.ए. | इलेक्ट्रॉनिक्स और इमिग्रेशन लॉ में डिप्लोमा

सम्मान

विद्यावाचस्पति और विद्या सागर की मानद उपाधियाँ

🏛️

संस्थान

विश्व हिंदी संस्थान, कनाडा के संस्थापक-अध्यक्ष

संक्षिप्त जीवन परिचय

मेरा जन्म 15 जून 1950 को जयपुर, राजस्थान, भारत में घई परिवार में हुआ। मैंने इतिहास, हिंदी और अंग्रेजी विषयों में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। मुझे विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ द्वारा 'विद्यावाचस्पति' (पीएच.डी.) और 'विद्यासागर' (डी.लिट.) की मानद उपाधियाँ प्रदान की गईं।

1991 में लगभग 25 वर्षों तक भारतीय टेलीकम्युनिकेशन विभाग में तकनीकी पर्यवेक्षक के पद पर सेवा देने के बाद, मैंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। इसके बाद 'जी.टी. टेक्निकल एजूकेशन बोर्ड, जयपुर' में 'डायरेक्टर प्रोजेक्ट्स' के पद पर कार्य किया।

1996 में अमेरिका और कनाडा में जीवन का दूसरा अध्याय शुरू किया। न्यूयॉर्क में रहते हुए मैंने 'एशिया ऑब्जर्वर', 'इंडिया पोस्ट', 'कश्मीर टुडे' जैसे समाचार पत्रों का संपादन किया। बाद में 'इंडिया पोस्ट' को कनाडा में भी प्रारंभ किया।

कनाडा में सेवा और साहित्य

1999 से मैंने उत्तर अमेरिका के पहले हिंदी-अंग्रेजी पाक्षिक समाचार पत्र 'नमस्ते कनाडा' का प्रकाशन शुरू किया। न्यू वी आर टीवी, ए.टी.एन. टीवी और रेडियो 770 ए.एम. पर मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन किया।

2004 से 2010 तक कनाडा के "टोरंटो विश्वविद्यालय" में हिंदी अध्यापन का कार्य किया। हिंदी एवं अंग्रेजी व्याकरण, सामान्य ज्ञान, इतिहास, पर्यावरण, लेप्रोसी, एड्स और कविता संग्रहों सहित मेरी लगभग 60 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

विश्व हिंदी संस्थान के अंतर्गत हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु अनेक कार्यक्रम किए। 2018 और 2019 में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलनों का आयोजन किया गया।

विशेष उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

  • 'मुक्तिपथ-प्रेमपथ महाकाव्यगीत' — हिंदी भाषा में रचित विश्व की सबसे लंबी धाराप्रवाह कविता
  • 'खट्टे-मीठे रिश्ते' — 66 उपन्यासकारों द्वारा सामूहिक रूप से रचित उपन्यास
  • 'राजद्रोही' — फिल्म निर्माण हेतु पंजीकृत उपन्यास
  • 'सुनो, तुम मुझसे झूठ तो नहीं बोल रहे' — 34 कहानीकारों द्वारा एक ही विषय पर रचित कहानी संग्रह
  • डूंगरपुर, राजस्थान में 'साहित्य रथ' का संचालन
  • टोरंटो, कनाडा में 'साहित्य रथ' का संचालन (2018, 2019, 2022)
  • भोपाल में 'साहित्य नौका' का संचालन
  • मृत्युपरांत अपने हृदय, दोनों आँखों और दोनों किडनियों के अंगदान का संकल्प

मेरी अभिलाषा

"चाह यही है सारे जग पर राज करे माँ भारती,

भारत के जन-जन के लब पर मुखरित हो माँ भारती,

अभिलाषा बस इतनी सी है 'सरन घई' की, सुन ले जग,

यू.एन.ओ. के भाषापट पर स्थापित हो माँ भारती।"

उपलब्धियाँ

🏆

संस्थापक-अध्यक्ष

विश्व हिंदी संस्थान, कनाडा

कनाडा में हिंदी भाषा और संस्कृति के प्रचार के लिए संस्थान की स्थापना और दशकों का नेतृत्व

🌍

अंतर्राष्ट्रीय प्रचार

हिंदी भाषा का विश्वव्यापी प्रसार

उत्तरी अमेरिका और विश्व भर में हिंदी को एक वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करने में योगदान

📚

शिक्षा और साहित्य

उल्लेखनीय साहित्यिक योगदान

हिंदी साहित्य में मूल्यवान रचनाएं और शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान

🎖️

मानद उपाधियाँ

विद्यावाचस्पति और विद्या सागर

भाषा और संस्कृति के प्रति उत्कृष्ट योगदान के लिए आंतरिक और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

❤️

सांस्कृतिक सेतु

भारत-कनाडा सांस्कृतिक संबंध

भारतीय संस्कृति और कनाडाई समाज के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु का निर्माण

👥

समुदाय नेतृत्व

समाजसेवी और प्रेरणा स्रोत

हजारों लोगों को प्रेरित करना और समुदाय के विकास में सक्रिय भूमिका

जीवन यात्रा

1950

जन्म

15 जून 1950 को जयपुर, राजस्थान, भारत में जन्म

1970s

शिक्षा

इतिहास, हिंदी और अंग्रेजी में एम.ए. की उपाधि प्राप्त करना

1980s

कनाडा प्रवास

कनाडा में बसकर हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रसार का कार्य आरंभ

1990s

विश्व हिंदी संस्थान की स्थापना

कनाडा में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए संस्थान की स्थापना

2000s

मानद सम्मान

विद्यावाचस्पति और विद्या सागर की मानद उपाधियाँ प्राप्त करना

वर्तमान

सेवा और प्रेरणा

निरंतर सामुदायिक सेवा, साहित्य सृजन और हजारों लोगों को प्रेरित करते रहना

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